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शबाना का दर्द,, कंहा से शुरू करें , कंहा खत्म करे*

मऊरानीपुर(झांसी) शबाना (काल्पनिक नाम) की व्यथा सुनने के बाद यह तय नही हो पाया कि उसके दर्द को कंहा से शुरू करे,कंहा खत्म करे,वह बताती है कि शादी के शतरंगी सपने लेकर मायके मौदहा जिला हमीरपुर से मऊरानीपुर ससुराल आई।शादी के बाद कुछ बेहद अच्छा लगा।इस दौरान एक पुत्री को जन्म दिया।इसी बीच पति को व्यापार करते समय शराब की लत ऐसी लगी कि शबाना की जिंदगी की बर्बादी शुरू हो गई।शराब ने पति का काम धंधा चौपट कर दिया पर शराब की लत नही छूटी।जब शबाना मायके गई तो शराब के लिए पति ने मकान बेच दिया।कुछ पैसे घर दिए बाकी शराब की भेंट चढ़ गए।इस दौरान शबाना को चार बच्चे हुए।अपने घर से सड़क पर आई शबाना ने नई बस्ती अलाव मैदान के पीछे किराए का घर ले लिया।लेकिन पति की नाकामी और काम ना करने से घर की आर्थिक हालत और बिगड़ गई।ऐसे में उसने हिम्मत नहीं हारी।पति की मारपीट,प्रताड़ना के बीच बच्चों व पति के भरण पोषण के लिए घर की दहलीज लांघ कर एक होटल में बर्तन मांजने का काम करने लगी।मिले पैसों से मकान का किराया,बच्चो के भरण पोषण करने लगी।होटल में कभी देर होने पर पति चरित्र पर उंगली उठाते हुए शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगा।जब उसने इंकार कर दिया तो फिर वही मारपीट का दौर शुरू हो गया।मायके की आर्थिक हालत और खराब होने पर वंहा से किसी भी प्रकार की मदद की उम्मीद भी खत्म हो गई।जब पति आत्महत्या की धमकी देने लगा तब उसने पुलिस की शरण ली।दिए प्रार्थना पर में पति के खिलाफ कार्यवाही की मांग की ताकि सुख चैन से रह सके।
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