मऊरानीपुर(झांसी)मंच पर विराजमान बाबा रामदास ब्रह्मचारी जी ने कहा कि कर्म की गति को जानना कठिन होता है क्योंकि कभी कभी सुकृत का फल कड़वा हो जाता और दुष्कृत मीठा होता है ।उदाहरण के रूप में उन्होंने अजामिल का जीवन प्रसंग कहा
और बताया कि पूर्व जन्म में यह एक नैष्ठिक ब्राह्मण था जिसे आकस्मिक रूप से
आई विपत्ति में एक ब्राह्मणी ने अपना शरीर दे कर इसके प्राण बचाए थे किन्तु इस
को अजामिल ने अपना अपमान समझ कर उस कन्या को वेश्या होने का श्राप दिया।बदल कर उस कन्या ने भी इसे वेश्यागामी होने का श्राप दिया। यद्यपि ये निर्दोष थे तथापि अगले जन्म में दोनों पति पत्नी हुएऔर सन्त कृपा से मुक्त हुए।कथा के दौरान डा गदाधर त्रिपाठी, हरि ओम श्रीधर, ओम प्रकाश
शर्मा, रमेश चन्द्र दीक्षित, राज कुमार ,विनय कुमार,अभिषेक राय,स्वामी राय,, मनीषा दीक्षित, विमला दीक्षित, सुशीला त्रिपाठी,
ममता त्रिपाठी, कैलाश दीक्षित , डा कृष्णा पाण्डेय ,जनार्दन मिश्र , फोटोग्राफर सुल्लन
सुशील पुरवार, दिनेश पटैरिया ,विशाल तिवारी,रवीन्द्र दीक्षित, शरदेन्दु सुल्लेरे,रमेश सोनी रोहित दुबे
दिनेश राजपूत, भइया जी सूरौठिया, आशु भारद्वाज ,, राकेश राय ,कालका प्रसाद भरद्वाज,प्रभाकर पाण्डेय, सन्तोष कुमार मिश्र,काजल द्विवेदी, किशोरी शरण अरजरिया, हरी मोहन ताम्रकार, सत्य नारायण अग्रवाल
रामनारायण चतुरर्वेदी
जय प्रकाश खरे विमला खरे
आयुष खरे सुभाष अवस्थी मुन्नी लाल कटारे शैलेन्द्र खरे,आर, के,त्रिपाठी,मुरारी लाल,राम गोपाल मोर रमेश चन्द्र नामदेव तथा सिद्धि दुबे,ऋद्धि दुबे,पूजा त्रिपाठी , अरविन्द भौंड़ेले, अनिल पाठक, प्रदीप पाठक,धर्मेन्द्र रिछारिया, कृष्ण गोपाल बबेले ,नरेन्द्र दमेले,
शिव शंकर मिश्र,उर्मिला तिवारी,पप्पू तिवारी,
कुलदीप तिवारी,अनीता तिवारी,
नमिता तिवारी,बृजेंद्र त्रिपाठी,शरद अग्रवाल
अनन्त राम सर्राफ,
बैजनाथ तिवारी तथा हरिश्चन्द्र आर्य एवं आशीष
कौशिक सम्मिलित हुए।