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विधानसभा,,224 - गणेश परिक्रमा में जुटे संभावित उम्मीदवार*

 मऊरानीपुर(झांसी) विधानसभा 2027 की दस्तक देते ही सभी दलों के संभावित उम्मीदवार विधानसभा 224 के लिए अपने आकाओं की गणेश परिक्रमा करने लगे हैं,,सबसे ज्यादा बेफिक्र भाजपाई है इन्हें सिर्फ पार्टी सिंबल और योगी मोदी पर पूरा भरोसा है कि उनकी दम पर वह दारुलशफा पहुंच जायेगे,,मतदाताओं से कोई मतलब नहीं --?,वही सबसे ज्यादा उम्मीदवार सपा से टिकिट लेने की होड में है।बसपा से अभी तक कोई चेहरा सामने नही है।कांग्रेस हर हाल में गठबंधन से चुनाव लड़ेगी ऐसी पूरी संभावना है।कारण कांग्रेस से राहुल,प्रियंका गांधी जितनी मेहनत कर रहे है।कांग्रेसी उतने ही उदासीन है।फेसबुक और इंस्ट्राग्राम पर संभावित प्रत्याशियों के चेहरे दिखने लगे हैं जिसमें जनता की रायशुमारी हो रही है।सपा से डा रघुवीर चौधरी सबसे ज्यादा गंभीर प्रत्याशी होने के साथ टिकिट की दावेदारी में आगे है।इनके अलावा सपा से कोई बड़ा चेहरा सामने नहीं है।जीत की जंग भाजपा और सपा गठबंधन के आमने सामने है।बसपा सुप्रीम पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के शांत रहने से कार्यकर्ता भी घर बैठे हैं।यहां सबसे गौर तलब यह है कि गांव की सरकार के चुनाव,विधानसभा के बाद होने है जिसके चलते विधानसभा प्रत्याशी खंड ब्लॉक मऊ की सभी 66 ग्राम पंचायतों के पूर्व में जीते प्रधानों व आमने सामने हारे प्रधान प्रत्याशियों रनर रहे पर्सनैल्टी की नब्ज टटोल रहे हैं।कारण गांव के चुनाव में में इनकी अहम भूमिका होना।कारो के काफिले और कारवां लगातार संपर्क में है। शहरी जनता के वोटों के बारे में भाजपा इसलिए निश्चिंत है क्योंकि यह पार्टी के वोट माने जाते हैं यह भ्रम की सबसे बड़ी भ्रम है।शहरी,कस्बाई वोट के लिए और कोई दल या विकल्प नहीं है ऐसा पार्टी को सबसे बड़ा भ्रम है।वर्तमान में 224 सीट पर तीन बार अल्प समय के लिए जनता से भाजपा विधायक बने प्रागीलाल अहिरवार भी जनता से ज्यादा फेसबुक पर कमेंट और लाइक में बिजी हैं लेकिन इनके बारे में खास बात यह है कि इनकी शहरी और गांव के मतदाताओं पर खासी पकड़ है।ये भाजपा से संभावित दावेदार है।वही चर्चाओं में खंड ब्लॉक बंगरा की ब्लॉक प्रमुख इंजीनियर भारती आर्य का नाम भाजपा खेमे में अलग बेचैनी किए हैं।ऐसे में अभी से लगातार जनता के बीच जनमत हासिल करने में लगे डॉ रघुवीर चौधरी गठबंधन से सभी प्रत्याशियों के लिए खासे हावी होंगे ऐसी जन चर्चा है।वही विधायक डा रश्मि आर्य अपनी परम्परागत सीट बरकरार रखने के लिए एडी चोटी का जोर लगाएगी इसमें भी कोई शक नहीं।कारण यह लगातार विधायक रहने के साथ विधानसभा के विकास और खुद की लोकप्रियता के सहारे मैदान में होगी,,यदि टिकिट नहीं भी मिलता है तो यह खुद का वजूद इतना बना चुकी है कि यदि निर्दलीय भी लड़े तो भी भारी पड़ेगी,ऐसा राजनीतिक पंडितों का मानना है।अभी समीकरण बनेंगे बिगड़ेंगे तब तक इलेक्ट्रॉनिक व शोसल मीडिया पर जनमत जुटाया जा रहा है।सारा दारोमदार टिकिट पाने पर है।जनता का ऊंट किस करवट बैठता है।यह आने कल बताएगा।
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